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देवालय से पहले शौचालय - मोदी बनाम जयराम रमेश - शारीरिक शुद्धता बनाम मानसिक शुद्घता
 

 
 
जयराम रमेश एव मोदी का यह बयान कि देवालय से पहले शौचालय अधिक आवश्यक हैं दोनों की ही भारतीय संस्कृति के संबंध में उनकी अनभिग्यता को दर्शाता है ।
दोनों का ही अपना अलग अलग महत्व है दोनों ही आवश्यक हैं व दोनों की तुलना नहीं की जा सकती । जहां तक देवालय के उपयोग की बात है तो देवालय का उपयोग मन की शुद्धि के लिए किया जाना चाहिए । मन से काम क्रोध लोभ मोह अंहकार को निकालने के लिए देवालय का उपयोग होना चाहिए व शरीर को शुद्घ करने के लिए शौचालय का प्रयोग किया जाता है ।
परंतु दोनों ने ही यह बयान दिया है क्योंकि वर्तमान में मंदिर का प्रयोग इस उद्देश्य के लिए न होकर मन्नत मांगने इत्यादि के लिए ही किया जाता है । मंदिर जाने का वास्तविक उद्देश्य भुला दिया गया है । मस्जिदें वर्तमान में मुसलमानों के संगठन का केन्द्र व मंदिर मन्नतों को पूरा करने का केन्द्र बन गए हैं ।
वर्तमान में मस्जिदों व मंदिरों के उपयोग को देखते हुए दोनों ने कुछ भी गलत नहीं कहा है । परंतु साथ ही साथ यह भी विचारणीय है कि दोनों ने ही देवालय व मंदिरों की तुलना तो शौचालय से तो की परंतु मस्जिदों से ही दोनों ने शौचालय की तुलना क्यों नहीं की ?
04/10/2013
......वापिस
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