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फिल्म गदर व पिंजर में अंतर
 

 



हिन्दुऒं व मुसलमानों की मानसिकता में १९४७ में कि स प्रकार विपरीत मानसिकता थी इसका अनुमान उस समय पर बनी दो फिल्मों को देखकर लगाया जा सकता है । वे दो फिल्में हैं गदर व पिंजर । आपको याद होगा कि जब गदर में नायिका विपरीत परिस्थितियों के कारण नायक के घर में आकर रहने लगती है तो पूरा हिन्दू समाज उससे लड़ने के लिए आ जाता है व स्वयं उसका ताया उसे मारने के लिए तलवार उठा लेता है । वहीं दूसरी ऒर पिंजर में मुसलमानों द्वारा हिन्दू युवतियों को जबरदस्ती मुसलमान घरों में कैद करके रखा जाता है जिसमें मुस्लिम महिलाएं भी पूरी तरह सहयोग करती है । दूसरी ऒर जब पिंजर की नायिका मुस्लिम के घर से भागकर अपने पिता के घर पहुंच जाती है तो उसका पिता उसे कहता है तू वापिस चला जा तू हमारे लिए मर गयी है । वहीं दूसरी ऒर गदर में नायिका का पिता उसे भारत से बाकायदा अपहरण करके ले जाता है और वहां पाकिस्तान में उसके दूसरे विवाह की तैयारी उसकी बिना इच्छा के करता है ।
 
हिन्दुऒ की इस सदगुण विकृति के कारण ही हमारे यहां की न जाने कितनी युवतियां मुसलमान घरों में इच्छा न होने के बावजूद रहने के लिए विवश हुई व उन्हीं की संताने आज हमारे लिए खतरा हो गयी है। हमारी मानसिकता में अब भी बदलाव नहीं आ पाया है । इसी कारण हमारे समाज की स्वीकृति न मिल पाने के कारण हमारे यहां मुसलमान घरों से आने वाली लड़कियों की प्रतिशतता बहुत कम है जबकि मुसलमानों द्वारा इसी विषय को लेकर लविंग जेहाद चलाया जा रहा है । अब भी समय है बंधुऒ हमें अपने मानसिकता में युद्धस्तर पर परिवर्तन करना होगा तभी इस्लामी जेहाद से निपटा जा सकता है ।
......वापिस
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