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पतवार चलाते जाएगें
यह उथल पुथल उत्ताल लहर , पथ से ना डिगाने पाएगी पतवार चलाते जाएगें मंजिल आएगी आएगी लहरों की गिनती क्या करना , कायर करतें है करने दो तूफानों से सहमें जो हैं पल पल मरते हैं मरने दो चिर पावन नूतन बीज लिए मनु की नौका तर जाऐगी पतवार चलाते जाएगें मंजिल आएगी आएगी अनगिन संकट जो झेल बढ़ा ,वह यान हमारा है नायक पर है विश्वास अटल , दिल में बाहों में दम खम है । यह रैन अधेरी बीतेगी उषा जय मुकुट चढ़ायेगी पतवार चलाते जाएगें मंजिल आएगी आएगी । विध्वंसो का तांडव फैला हम टिके सृजन के हेम शिखर हम मनु के पुत्र प्रतापी हैं वर्चस्वी धीरों दत्त प्रखर असुरों की कपट कुचाल कुटिल श्रृद्धा सबको सुलझाएगी पतवार चलाते जाऐंगे मंजिल आएगी आएगी । इतिहास हमारा है सम्बल है विज्ञान हमारा है भुजबल गत वैभव का आदर्श आज कर देगा भावी भी उज्ज्वल नूतन निर्मित की तृप्ति अमर फिर गीत विजय के गाएगी पतवार चलाते जाएगें मंजिल आएगी आएगी । इस धरती में शक हूण मिटें गजनी गौरी अरु अब्दाली पश्चिम की लहरें लौट गयी लेले अपनी झोली खाली पूजीं शाही बर्बरता सब ये धरती उदर समाऐगी पतवार चलाते जाऐंगे मंजिल आएगी आएगी
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