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सबको शाखा लाएगें
यही मंत्र है यही साधना , ग्राम ग्राम में जाएगें हिन्दू हिन्दू जुटाजुटाकर सबको शाखा लाएगें विस्मृति मे जो दबा पड़ा वह , समाज हम चेताएगें मानस पर है जो जमी राख जो सत्वर उसे हटाएगें चिंगारी प्रगटेगी उसमें अपने दोष जलाएगे । हिन्दू हिन्दू जुटाजुटाकर सबको शाखा लाएगेंं । अपना देश धरित्री प्यारी , मां का रूप निहारेंगे हम है सारे सपूत इसके , बन्धु भाव विकसाएंगे ऊंच नीच सब भेद हटाकर , समता ममता लाएगें । हिन्दू हिन्दू जुटाजुटाकर सबको शाखा लाएगें । अपने पुरखों की धरती का , बीता गौरव लाएगें इसी हेतु हम अपना सब कुछ , अर्पित करते जाऐगें केशव के चिन्तन में था , जो हिन्दू राष्ट सरसाऐंगें हिन्दू हिन्दू जुटाजुटाकर सबको शाखा लाएगें ।
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